ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 5757.7अथर्ववेद 57.7अ॒र्वा॒वतो॑ न॒ आ ग॒ह्यथो॑ शक्र परा॒वतः॑ । उ॒ लो॒को यस्ते॑ अद्रिव॒ इन्द्रे॒ह तत॒ आ ग॑हि ॥७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय