ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 5252.2अथर्ववेद 52.2स्वर॑न्ति त्वा सु॒ते नरो॒ वसो॑ निरे॒क उ॒क्थिनः॑ । क॒दा सु॒तं तृ॑षा॒ण ओक॒ आ ग॑म॒ इन्द्र॑ स्व॒ब्दीव॒ वंस॑गः ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय