ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 4747.8अथर्ववेद 47.8आ त्वा॑ ब्रह्म॒युजा॑ हरी॒ वह॑तामिन्द्र के॒शिना॑ । उप॒ ब्रह्मा॑णि नः शृणु ॥८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय