ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 4444.1अथर्ववेद 44.1प्र स॒म्राजं॑ चर्षणी॒नामिन्द्रं॑ स्तोता॒ नव्यं॑ गी॒र्भिः । नरं॑ नृ॒षाहं॒ मंहि॑ष्ठम् ॥१॥अगलापूरा अध्याय