ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 3838.4अथर्ववेद 38.4इन्द्र॒मिद् गा॒थिनो॑ बृ॒हदिन्द्र॑म॒र्केभि॑र॒र्किणः॑ । इन्द्रं॒ वाणी॑रनूषत ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय