ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 3838.2अथर्ववेद 38.2आ त्वा॑ ब्रह्म॒युजा॒ हरी॒ वह॑तामिन्द्र के॒शिना॑ । उप॒ ब्रह्मा॑णि नः शृणु ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय