ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 2727.5अथर्ववेद 27.5य॒ज्ञ इन्द्र॑मवर्धय॒द् यद् भूमिं॒ व्यव॑र्तयत्। च॒क्रा॒ण ओ॑प॒शं दि॒वि ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय