ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 1818.4अथर्ववेद 18.4व॒यमि॑न्द्र त्वा॒यवो॒ऽभि प्र णो॑नुमो वृषन्। वि॒द्धि त्व॑१स्य नो॑ वसो ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय