ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 135135.5अथर्ववेद 135.5प॒त्नी यदृ॑श्यते प॒त्नी यक्ष्य॑माणा जरित॒रोऽथामो॑ दै॒व। हो॒ता वि॑ष्टीमे॒न ज॑रित॒रोऽथामो॑ दै॒व ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय