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अथर्ववेद 127.6

प्र रे॑भ॒ धीं भ॑रस्व गो॒विदं॑ वसु॒विद॑म्।
दे॒व॒त्रेमां वाचं॑ स्रीणी॒हीषु॒र्नावी॑र॒स्तार॑म् ॥६॥

पूरा अध्याय