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अथर्ववेद 122.2

आ घ त्वावा॒न् त्मना॒प्त स्तो॒तृभ्यो॑ धृष्णविया॒नः । ऋ॒णोरक्षं॒ न च॒क्र्योः ॥२॥

पूरा अध्याय