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अथर्ववेद 118.1

श॒ग्ध्यू॒३षु श॑चीपत॒ इन्द्र॒ विश्वा॑भिरू॒तिभिः॑ ।
भगं॒ न हि त्वा॑ य॒शसं॑ वसु॒विद॒मनु॑ शूर॒ चरा॑मसि ॥१॥

पूरा अध्याय