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अथर्ववेद 115.3

ये त्वामि॑न्द्र॒ न तु॑ष्टु॒वुर्ऋष॑यो॒ ये च॑ तुष्टु॒वुः । ममेद् व॑र्धस्व॒ सुष्टु॑तः ॥३॥

पूरा अध्याय