ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 114114.1अथर्ववेद 114.1अ॒भ्रा॒तृ॒व्यो अ॒ना त्वमना॑पिरिन्द्र ज॒नुषा॑ स॒नाद॑सि । यु॒धेदा॑पि॒त्वमि॑च्छसे ॥१॥अगलापूरा अध्याय