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अथर्ववेद 111.2

यद् वा॑ शक्र परा॒वति॑ समु॒द्रे अधि॒ मन्द॑से । अ॒स्माक॒मित् सु॒ते र॑णा॒ समिन्दु॑भिः ॥२॥

पूरा अध्याय