ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 106106.2अथर्ववेद 106.2तव॒ द्यौरि॑न्द्र॒ पौंस्यं॑ पृथि॒वी व॑र्धति॒ श्रवः॑ । त्वामापः॒ पर्व॑तासश्च हिन्विरे ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय