ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 104104.3अथर्ववेद 104.3आ नो॒ विश्वा॑सु॒ हव्य॒ इन्द्रः॑ स॒मत्सु॑ भूषतु । उप॒ ब्रह्मा॑णि॒ सव॑नानि वृत्र॒हा प॑रम॒ज्या ऋची॑षमः ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय