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अथर्ववेद 27.5

तया॒हं शत्रू॑न्त्साक्ष॒ इन्द्रः॑ सालावृ॒काँ इ॑व ।
प्राशं॒ प्रति॑प्राशो जह्यर॒सान् कृ॑ण्वोषधे ॥५॥

पूरा अध्याय