ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 19सूक्त 88.5अथर्ववेद 8.5अ॒प॒पा॒पं प॑रिक्ष॒वं पुण्यं॑ भक्षी॒महि॒ क्षव॑म्। शि॒वा ते॑ पाप॒ नासि॑कां॒ पुण्य॑गश्चा॒भि मे॑हताम् ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय