अथर्ववेद 59.3
आ दे॒वाना॒मपि॒ पन्था॑मगन्म॒ यच्छ॒क्नवा॑म॒ तद॑नु॒प्रवो॑ढुम्।
अ॒ग्निर्वि॒द्वान्त्स य॑जा॒त् स इद्धोता॒ सोऽध्व॒रान्त्स ऋ॒तून् क॑ल्पयाति ॥३॥
आ दे॒वाना॒मपि॒ पन्था॑मगन्म॒ यच्छ॒क्नवा॑म॒ तद॑नु॒प्रवो॑ढुम्।
अ॒ग्निर्वि॒द्वान्त्स य॑जा॒त् स इद्धोता॒ सोऽध्व॒रान्त्स ऋ॒तून् क॑ल्पयाति ॥३॥