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अथर्ववेद 54.1

का॒लादापः॒ सम॑भवन् का॒लाद् ब्रह्म॒ तपो॒ दिशः॑ ।
का॒लेनोदे॑ति॒ सूर्यः॑ का॒ले नि वि॑शते॒ पुनः॑ ॥१॥

पूरा अध्याय