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अथर्ववेद 50.7

उ॒षसे॑ नः॒ परि॑ देहि॒ सर्वा॒न् रात्र्य॑ना॒गसः॑ ।
उ॒षा नो॒ अह्ने॒ आ भ॑जा॒दह॒स्तुभ्यं॑ विभावरि ॥७॥

पूरा अध्याय