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अथर्ववेद 49.8

भ॒द्रासि॑ रात्रि चम॒सो न वि॒ष्टो विष्वं॒ गोरू॑पं युव॒तिर्बि॑भर्षि ।
चक्षु॑ष्मती मे उश॒ती वपूंषि॒ प्रति॒ त्वं दि॒व्या न क्षाम॑मुक्थाः ॥८॥

पूरा अध्याय