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अथर्ववेद 48.2

रात्रि॒ मात॑रु॒षसे॑ नः॒ परि॑ देहि ।
उ॒षा नो॒ अह्ने॒ परि॑ ददा॒त्वह॒स्तुभ्यं॑ विभावरि ॥२॥

पूरा अध्याय