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अथर्ववेद 31.4

यद् द्वि॒पाच्च॒ चतु॑ष्पाच्च॒ यान्यन्ना॑नि॒ ये रसाः॑ ।
गृ॒ह्णे॒३हं॑ त्वेषां॑ भू॒मानं॒ बिभ्र॒दौदु॑म्बरं म॒णिम् ॥४॥

पूरा अध्याय