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अथर्ववेद 30.5

यत् स॑मु॒द्रो अ॒भ्यक्र॑न्दत् प॒र्जन्यो॑ वि॒द्युता॑ स॒ह।
ततो॑ हिर॒ण्ययो॑ बि॒न्दुस्ततो॑ द॒र्भो अ॑जायत ॥५॥

पूरा अध्याय