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अथर्ववेद 29.4

मृ॒ण द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे मृ॒ण मे॑ पृतनाय॒तः ।
मृ॒ण मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ मृ॒ण मे॑ द्विष॒तो म॑णे ॥४॥

पूरा अध्याय