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अथर्ववेद 28.8

कृ॒न्त द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे कृ॒न्त मे॑ पृतनाय॒तः ।
कृ॒न्त मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ कृ॒न्त मे॑ द्विष॒तो म॑णे ॥८॥

पूरा अध्याय