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अथर्ववेद 28.10

विध्य॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ विध्य॑ मे पृतनाय॒तः ।
विध्य॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ विध्य॑ मे द्विष॒तो म॑णे ॥१०॥

पूरा अध्याय