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अथर्ववेद 1.2

इ॒मं होमा॑ य॒ज्ञम॑वते॒मं सं॑स्रावणा उ॒त।
य॒ज्ञमि॒मं व॑र्धयता गिरः संस्रा॒व्येऽण ह॒विषा॑ जुहोमि ॥२॥

पूरा अध्याय