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अथर्ववेद 4.88

आ त्वा॑ग्न इधीमहि द्यु॒मन्तं॑ देवा॒जर॑म्।
यद् घ॒ सा ते॒ पनी॑यसी स॒मिद् दी॒दय॑ति॒ द्यवि॑ ।
इषं॑ स्तो॒तृभ्य॒ आ भ॑र ॥८८॥

पूरा अध्याय