ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 18सूक्त 44.75अथर्ववेद 4.75ए॒तत् ते॑ प्रततामह स्व॒धा ये च॒ त्वामनु॑ ॥७५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय