ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 18सूक्त 44.61अथर्ववेद 4.61अक्ष॒न्नमी॑मदन्त॒ ह्यव॑ प्रि॒यां अ॑धूषत । अस्तो॑षत॒ स्वभा॑नवो॒ विप्रा॒ यवि॑ष्ठा ईमहे ॥६१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय