ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 18सूक्त 44.22अथर्ववेद 4.22अ॒पू॒पवा॒न् मधु॑मांश्च॒रुरेह सी॑दतु । लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ ॥२२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय