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अथर्ववेद 4.1

आ रो॑हत॒ जनि॑त्रीं जा॒तवे॑दसः पितृ॒याणैः सं व॒ आ रो॑हयामि ।
अवा॑ड्ढ॒व्येषि॒तो ह॑व्य॒वाह ईजा॒नं यु॒क्ताः सु॒कृतां॑ धत्त लो॒के ॥१॥

पूरा अध्याय