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अथर्ववेद 3.64

आ रो॑हत॒ दिव॑मुत्त॒मामृष॑यो॒ मा बि॑भीतन ।
सोम॑पाः॒ सोम॑पायिन इ॒दं वः॑ क्रियते ह॒विरग॑न्म॒ ज्वोति॑रुत्त॒मम् ॥६४॥

पूरा अध्याय