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अथर्ववेद 2.6

त्रिक॑द्रुकेभिः पवते॒ षडु॒र्वीरेक॒मिद् बृ॒हत्।
त्रि॒ष्टुब् गा॑य॒त्री छन्दां॑सि॒ सर्वा॒ ता य॒म आर्पि॑ता ॥६॥

पूरा अध्याय