ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 18सूक्त 22.39अथर्ववेद 2.39प्रेमां मात्रां॑ मिमीमहे॒ यथाप॑रं॒ न मासा॑तै । श॒ते श॒रत्सु॒ नो पु॒रा ॥३९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय