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अथर्ववेद 2.19

स्यो॒नास्मै॑ भव पृथिव्यनृक्ष॒रा नि॒वेश॑नी ।
यच्छा॑स्मै॒ शर्म॑ स॒प्रथाः॑ ॥१९॥

पूरा अध्याय