ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 18सूक्त 22.19अथर्ववेद 2.19स्यो॒नास्मै॑ भव पृथिव्यनृक्ष॒रा नि॒वेश॑नी । यच्छा॑स्मै॒ शर्म॑ स॒प्रथाः॑ ॥१९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय