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अथर्ववेद 1.25

आदि॑त्य॒ नाव॒मारु॑क्षः श॒तारि॑त्रां स्व॒स्तये॑ ।
अह॒र्मात्य॑पीपरो॒ रात्रिं॑ स॒त्राति॑ पारय ॥२५॥

पूरा अध्याय