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अथर्ववेद 7.4

तं श्र॒द्धा च॑ य॒ज्ञश्च॑ लो॒कश्चान्नं॑ चा॒न्नाद्यं॑ च भू॒त्वाभि॑प॒र्याव॑र्तन्त ॥४॥

पूरा अध्याय