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अथर्ववेद 5.14

रु॒द्र ए॑नमिष्वा॒सो ध्रु॒वाया॑ दि॒शो अ॑न्तर्दे॒शादनु॑ष्ठा॒तानु॑ तिष्ठति॒ नैनं॑ श॒र्वो न भ॒वो नेशा॑नः ॥१४॥

पूरा अध्याय