ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 15सूक्त 1010.5अथर्ववेद 10.5अतो॒ वै बृह॒स्पति॑मे॒व ब्रह्म॒ प्रावि॑श॒दिन्द्रं॑ क्ष॒त्रम् ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय