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अथर्ववेद 2.63

इ॒यं नार्युप॑ ब्रूते॒ पूल्या॑न्यावपन्ति॒का।
दी॒र्घायु॑रस्तु मे॒ पति॒र्जीवा॑ति श॒रदः॑ श॒तम् ॥६३॥

पूरा अध्याय