ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 14सूक्त 22.63अथर्ववेद 2.63इ॒यं नार्युप॑ ब्रूते॒ पूल्या॑न्यावपन्ति॒का। दी॒र्घायु॑रस्तु मे॒ पति॒र्जीवा॑ति श॒रदः॑ श॒तम् ॥६३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय