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अथर्ववेद 2.55

बृह॒स्पति॒नाव॑सृष्टां॒ विश्वे॑ दे॒वा अ॑धारयन्।
भजो॒ गोषु॒ प्रवि॑ष्टो॒ यस्तेने॒मां सं सृ॑जामसि ॥५५॥

पूरा अध्याय