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अथर्ववेद 2.47

य ऋ॒ते चि॑दभि॒श्रिषः॑ पु॒रा ज॒त्रुभ्य॑ आ॒तृदः॑ ।
संधा॑ता सं॒धिं म॒घवा॑ पुरू॒वसु॒र्निष्क॑र्ता॒ विह्रु॑तं॒ पुनः॑ ॥४७॥

पूरा अध्याय