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अथर्ववेद 2.44

नवं॒ वसा॑नः सुर॒भिः सु॒वासा॑ उ॒दागां॑ जी॒व उ॒षसो॑ विभा॒तीः ।
आ॒ण्डात् प॑त॒त्रीवा॑मुक्षि॒ विश्व॑स्मा॒देन॑स॒स्परि॑ ॥४४॥

पूरा अध्याय