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अथर्ववेद 2.40

आ वां॑ प्र॒जां ज॑नयतु प्र॒जाप॑तिरहोरा॒त्राभ्यां॒ सम॑नक्त्वर्य॒मा।
अदु॑र्मङ्गली पतिलो॒कमा वि॑शे॒मं शं नो॑ भव द्वि॒पदे॒ शं चतु॑ष्पदे ॥४०॥

पूरा अध्याय