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अथर्ववेद 1.59

उद्य॑च्छध्व॒मप॒ रक्षो॑ हनाथे॒मं नारीं॑ सुकृ॒ते द॑धात ।
धा॒ता वि॑प॒श्चित् पति॑म॒स्यै वि॑वेद॒ भगो॒ राजा॑ पु॒र ए॑तु प्रजा॒नन् ॥५९॥

पूरा अध्याय