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अथर्ववेद 1.6

रोहि॑तो॒ द्यावा॑पृथि॒वी ज॑जान॒ तत्र॒ तन्तुं॑ परमे॒ष्ठी त॑तान ।
तत्र॑ शिश्रिये॒ऽज एक॑पा॒दोऽदृं॑ह॒द् द्यावा॑पृथि॒वी बले॑न ॥६॥

पूरा अध्याय